पॉलिसी होल्डर्स और कर्मचारियों का बंपर रिस्पॉन्स, 3 गुना हुआ सब्सक्राइब

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एलआईसी का आईपीओ 4 मई को खुला और पूरे 6 दिन बिडिंग के लिए ओपन रहा. इसके बाद अब 17 मई को एलआईसी के शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे. एनालिस्ट प्रीमियम पर लिस्टिंग की उम्मीद कर रहे हैं.

LIC IPO Over Subscribed: सरकारी बीमा कंपनी एलआईसी के आईपीओ (LIC IPO) को इन्वेस्टर्स का बंपर रिस्पॉन्स मिला. आज सोमवार को अंतिम दिन इस आईपीओ को करीब 3 गुना सब्सक्राइब किया गया. देश के सबसे बड़े आईपीओ ‘LIC IPO’ को पॉलिसी होल्डर्स (Policy Holders) और कर्मचारियों (Employees) ने खास तौर पर हाथों-हाथ लिया. एलआईसी आईपीओ को शुरुआत के 2 दिन में ही 100 फीसदी से ज्यादा सब्सक्राइब कर लिया गया था.

सबसे बड़े आईपीओ को मिला इतना सब्सक्रिप्शन

आंकड़ों के अनुसार, इस आईपीओ को सभी कैटेगरी में इन्वेस्टर्स से बढ़िया रिस्पॉन्स मिला है. आईपीओ को सबसे ज्यादा सब्सक्रिप्शन पॉलिसी होल्डर्स की कैटेगरी में मिला. इस कैटेगरी में आईपीओ को 6.05 गुना सब्सक्राइब किया गया. इसी तरह एलआईसी के कर्मचारियों (LIC Employees) के लिए रिजर्व रखे गए हिस्से को 4.36 गुना सब्सक्राइब किया गया. रिटेल इन्वेस्टर्स (Retail Investors) का हिस्सा भी 1.97 गुना सब्सक्राइब किया गया. इनके अलावा QIB के लिए रखे गए हिस्से को 2.83 गुना और NII के हिस्से को 2.91 गुना सब्सक्राइब किया गया. कुल मिलाकर एलआईसी आईपीओ को 2.93 गुना सब्सक्रिप्शन मिला.

वीकेंड पर भी ओपन था एलआईसी का आईपीओ

इस आईपीओ के साथ ही कई नए रिकॉर्ड भी बने. यह न सिर्फ भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बन गया, बल्कि पहली बार ऐसा हुआ कि आईपीओ वीकेंड पर भी बिडिंग के लिए खुला रहा. आम निवेशकों और संस्थागत खरीदारों के लिए LIC का आईपीओ 4 से 9 मई तक खुला रहा. शनिवार और रविवार को भी आईपीओ के खुले रहने से इन्वेस्टर्स को बिड डालने के लिए पूरे 6 दिन मिले. एलआईसी आईपीओ पहले 2 दिन में ही पूरी तरह से भर गया था. वीकेंड के 2 दिनों में इसे 41 फीसदी सब्सक्राइब किया गया.

इन इन्वेस्टर्स को मिला रिजर्वेशन और डिस्काउंट

इस बहुप्रतीक्षित आईपीओ में खुदरा निवेशकों के लिए 35 फीसदी शेयर रिजर्व रखे गए थे. आईपीओ के तहत, 15.8 लाख शेयर एलआईसी कर्मचारियों के लिए और 2.21 करोड़ शेयर पॉलिसीधारकों के लिए रिजर्व थे. पात्र संस्थागत खरीदारों (QIB) के लिए 9.88 करोड़ से अधिक शेयर और गैर-संस्थागत खरीदारों के लिए 2.96 करोड़ से अधिक शेयर आरक्षित थे. खुदरा निवेशकों और एलआईसी कर्मचारियों को प्रति शेयर 45 रुपये की छूट दी गई, जबकि एलआईसी के पॉलिसीधारकों को 60 रुपये प्रति शेयर की छूट मिली.

 

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