100 साल से ज्यादा पुराने इस सरकारी बैंक की मजबूरी, बंद करने पड़ रहे 600 ब्रांच

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सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को कुछ अन्य सरकारी बैंकों के साथ 2017 में रिजर्व बैंक (RBI) के पीसीए (PCA) के दायरे में डाला गया था. हालांकि तब से अब तक सिर्फ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को छोड़ बाकी के सारे बैंकों ने अपनी फाइनेंशियल कंडीशन ठीक कर ली और…

सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank Of India) को फाइनेंशियल कंडीशन (Financial Condition) बेहतर बनाने के लिए अपने कई ब्रांचेज को बंद करना पड़ रहा है. खबरों के अनुसार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया वैसे ब्रांचेज को बंद करने वाला है, जो या तो कई साल से घाटे में चल रहे हैं या अच्छा बिजनेस कर पाने में नाकामयाब हैं. बैंक के आकलन के अनुसार, इस आधार पर उसके 13 फीसदी ब्रांच बंद हो जाएंगे.

अभी सेंट्रल बैंक के पास इतने ब्रांच

100 साल से ज्यादा पुराने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पास अभी 4,594 ब्रांचेज का बड़ा नेटवर्क है. अगर बैंक अपने 13 फीसदी ब्रांचेज को बंद करता है तो इनकी कुल संख्या करीब 600 हो जाएगी. बैंक की योजना है कि कुछ ब्रांचेज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाए और कुछ मामलों में आस-पास के ब्रांचेज को मिला दिया जाए. बैंक की योजना अगले साल मार्च तक ब्रांचेज की संख्या में 600 कमी लाने की है.

इन संपत्तियो को भी बेचने की योजना

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में सरकारी सूत्र के हवाले से बताया गया है कि यह फाइनेंस बेहतर करने का बैंक का सबसे मुश्किल प्रयास है. इसके बाद बैंक की योजना रियल एस्टेट जैसे नॉन-कोर संपत्तियों को बेचने की है. अधिकारी ने बताया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का यह कदम खाते में घाटे में जा रही संपत्तियों को कम करने की योजना के तहत है. हालांकि ब्रांचेज बंद करने की योजना के बारे में अभी सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है.

पाबंदियों के दायरे में अकेला सेंट्रल बैंक

आपको बता दें कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को कुछ अन्य सरकारी बैंकों के साथ 2017 में रिजर्व बैंक (RBI) के पीसीए (PCA) के दायरे में डाला गया था. हालांकि तब से अब तक सिर्फ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को छोड़ बाकी के सारे बैंकों ने अपनी फाइनेंशियल कंडीशन ठीक कर ली और लिस्ट से बाहर आ गए. अभी रिजर्व बैंक की पीसीए लिस्ट में सिर्फ सेंट्रल बैंक की बचा हुआ है. बैंक 2017 से ही प्रॉफिट के मामले में जूझ रहा है. बैंक को अपने कर्मचारियों का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने में भी दिक्कतें आ रही हैं.

 

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