Excise Duty On Petrol-Diesel Central Government Petrol Price Down Diesel Price Down

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Excise Duty on Petrol-Diesel: केंद्र सरकार (Central Government) कल शाम को देर रात पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में कटौती कर दी है, जिसके बाद आपको पेट्रोल-डीजल खरीदने के लिए कम पैसे खर्च करने होंगे. इस कटौती के बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है… आइए आपको बताते हैं कि वित्तमंत्री सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने इस बारे में क्या कहा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया है उन्होंने कहा कि वाहन ईंधन पर उत्पाद शुल्क कटौती से केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी प्रभावित होगी.

रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स में हुई कटौती
सीतारमण ने रविवार को कहा कि पेट्रोल में आठ रुपये और डीजल में छह रुपये की कटौती इन ईंधनों पर लगाए जाने वाले रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स में की गई है, जिसके संग्रह को राज्यों के साथ कभी साझा नहीं किया जाता. ऐसे में विपक्ष का यह आरोप सही नहीं है.

कम होगी राज्यों की हिस्सेदारी
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम और अन्य विपक्षी नेताओं ने कहा था कि सरकार ने शनिवार शाम को एक्साइज ड्यूटी में कटौती की जो घोषणा की है उससे केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी कम हो जाएगी. हालांकि, बाद में रविवार को चिदंबरम ने अपना बयान वापस लेते हुए कहा है कि करों में कटौती का भार अकेले केंद्र सरकार ही वहन करेगी.

वित्तमंत्री ने किया ट्वीट
सीतारमण ने ट्विटर पर लिखा कि वह पेट्रोल और डीजल पर लगाए जाने वाले टैक्स के बारे में उपयोगी जानकारी साझा कर रही हैं जो सभी के लिए लाभदायक होगी. उन्होंने कहा, ‘‘मूल उत्पाद शुल्क (BED), स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर टैक्स और एग्रीकल्चर और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट टैक्स को मिलाकर पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क होता है. बता दें बेसिक एक्साइज ड्यूटी को राज्यों के साथ शेयर किया जाता है. वहींस एसएईडी, आरआईसी और एआईडीसी को साझा नहीं किया जाता.’’

नवंबर में भी हुई थी कटौती
वित्त मंत्री ने कहा कि पेट्रोल पर आठ रुपये प्रति लीटर और डीजल पर छह रुपये प्रति लीटर की उत्पाद शुल्क कटौती पूरी तरह से आरआईसी में की गई है. नवंबर, 2021 में जब पेट्रोल पर पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर घटाए गए थे तब भी कटौती आरआईसी में ही की गई थी.

41 फीसदी राज्यों के पास जाता है
केंद्र-राज्य कर साझेदारी की व्यवस्था के तहत केंद्र जो कर संग्रह करता है उनमें से 41 फीसदी राज्यों के पास जाता है. हालांकि, इनमें उपकर के जरिए लेवी के रूप में जुटाया गया कर शामिल नहीं होता. पेट्रोल और डीजल पर लगाया जाने वाला ज्यादातर कर ‘उपकर’ होता है.

जानें कितना है टैक्स का हिस्सा?
शनिवार की कटौती से पहले पेट्रोल पर केंद्रीय कर 27.90 रुपये प्रति लीटर था. मूल उत्पाद शुल्क सिर्फ 1.40 रुपये प्रति लीटर था. इसी तरह डीजल पर 21.80 रुपये का कुल केंद्रीय कर था और मूल उत्पाद शुल्क सिर्फ 1.80 रुपये था.

प्रति लीटर पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 11 रुपये और डीजल पर आठ रुपये था. पेट्रोल पर एआईडीसी 2.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर चार रुपये प्रति लीटर था. पेट्रोल पर 13 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क आरआईसी के रूप में लगाया गया था और डीजल पर आठ रुपये प्रति लीटर इस तरह का शुल्क लगाया गया था. शनिवार को उत्पाद शुल्क कटौती इसी में की गई है. पेट्रोल पर सिर्फ 1.40 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 1.80 रुपये प्रति लीटर का बीईडी संग्रह राज्यों के साथ साझा किया जाता है.

2,20,000 करोड़ रुपये का पड़ेगा असर
सीतारमण ने कहा, ‘‘मूल उत्पाद शुल्क जिसे राज्यों के साथ शेयर किया जाता है उसे छुआ भी नहीं गया है. अत: कर में दो बार की गई कटौती (पहली कटौती नवंबर में और दूसरी शनिवार को) का भार केंद्र उठाएगा.’’ उन्होंने बताया कि कल जो टैक्स कटौती की गई उसका केंद्र पर 1,00,000 करेाड़ रुपये का भार पड़ेगा. नवंबर, 2021 में जो कर कटौती की गई थी उसका केंद्र पर भार 1,20,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष पड़ा है. केंद्र के राजस्व पर कुल 2,20,000 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा.’’

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