India Economic Growth Could Be Impacted If RBI Hikes Interest Rates Says Finance Secretary

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Indian Economy: बढ़ती महंगाई से आम आदमी तो परेशान है ही पर ये अपने साथ कई दूसरी परेशानियां भी लेकर आ रहा है. महंगाई से जहां आम आदमी की जेब कट रही है. लेकिन इसके चलते कर्ज भी महंगा होता जा रहा है जिसका असर देश के आर्थिक विकास पर पड़ सकता है. 

महंगे कर्ज से सुस्त होगी आर्थिक विकास की रफ्तार 
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त मंत्रालय के वित्त सचिव टी वी सोमानाथन ने कहा है कि आरबीआई अगर ब्याज दरें बढ़ाता है तो इसके चलते देश के आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. वहीं माना जा रहा है जून में जब आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक होगी तो उसमें 2022-23 के लिए महंगाई दर के अनुमान को बढ़ाया जा सकता है. फिलहाल अप्रैल के मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी में आरबीआई ने 2022-23 में 5.7 फीसदी महंगाई दर रहने का अनुमान जताया था. लेकिन मार्च में खुदरा महंगाई दर 6.95 फीसदी रहा है जो आरबीआई के 6 फीसदी के तय सीमा से ज्यादा है. ऐसे में जून एमपीसी की मीटिंग में आरबीआई 2022-23 के महंगाई दर के अनुमान को 5.7 फीसदी से ज्यादा बढ़ा सकती है. 

आरबीआई ने कर्ज किया महंगा 
इससे पहले आरबीआई के मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की इमरजेंसी बैठक 2 से 4 मई तक हुई थी. जिसके बाद आरबीाई ने रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर उसे 4.40 फीसदी कर दिया. जिसके बाद कर्ज लगातार महंगा होता जा रहा है, लोगों की ईएमआई महंगी हो रही है. कहने को आरबीआई महंगाई पर नकेल कसने के लिए कर्ज महंगा कर रही है लेकिन महंगी ईएमआई आम लोगों को और परेशान कर रही है. अब अप्रैल महीने के लिए खुदरा महंगाई दर के जो आंकड़े आए हैं वो 7.79 फीसदी पर है. जिसके बाद माना जा रहा है कि आरबीआई आने वाले दिनों में फिर से कर्ज को महंगा कर सकता है. 

मार्गन स्टैनले ने घटाया जीडीपी अनुमान
इससे पहले मार्गन स्टैनले (Morgan Stanley) ने भी कहा है कि बढ़ती महंगाई ( Inflation), कच्चे तेल ( Crude Oil) की बढ़ती कीमतों और घरेलू मांग में कमी ( Weak Domestic Demand) के चलते देश के आर्थिक विकास ( Economic Growth) की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. ब्रोकरेज हाउस ने अपनी रिपोर्ट में अगले दो वित्त वर्ष के लिए भारत के इकोनॉमिक ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है. मार्गन स्टैनले के मुताबिक 2022-23 वित्त वर्ष में  भारत का जीडीपी 7.6 फीसदी रहने का अनुमान है तो 2023-24 में जीडीपी (GDP) उससे भी कम 6.7 फीसदी रह सकता है. 

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