Rainbow Childrens Medicare After Weak Listing Follow This Strategy Is The Share

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Rainbow Children’s Medicare: भारत की मल्टी स्पेशियलिटी पेडियाट्रिक, ऑब्सटेट्रिक्सऔर गाइनेकोलॉजी हास्पिटल चेन रेनबो चिल्ड्रंस मेडिकेयर का 10 मई का शेयर बाजार में कमजोर आगाज देखने को मिला है. ये शेयर 542 रुपये के इश्यू प्राइस की तुलना में 6 फीसदी डिस्काउंट के साथ 510 रुपये प्रति शेयर के भाव पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लिस्ट हुआ.

साथ ही बीएसई (BSE) पर ये 506 रुपये पर लिस्ट हुआ. दोपहर करीब 1 बजे शेयर 19 फीसदी की कमजोरी के साथ 438 रुपये पर चला गया. हालांकि आज इसमें जरूर कुछ बढ़त दिखाई दे रही है और खबर लिखे जाने तक ये 3.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 466.40 रुपए प्रति शेयर पर कारोबार करता देखा गया.

लिस्टिंग से पहले विशेषत्र IPO को लेकर सकारात्मक थे और उन्होंने इश्यू के लिए ‘सब्सक्राइब’ की रेटिंग दी थी. हालांकि, जिओपॉलिटिकल संकट और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के चलते जारी उतार-चढ़ाव और निगेटिव सेंटीमेंट का इश्यू पर खासा असर दिखा और ये बाजार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका.

अब शेयर में क्या किया जाए?

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी की कमजोर लिस्टिंग की वजह उतार-चढ़ाव, निगेटिव सेंटीमेंट और हॉस्पिटल बिजनेस के प्रति इनवेस्टर्स की कम दिलचस्पी हो सकती हैं. वो ये भी कहते हैं कि कंपनी का स्पेशलाइज्ड बिजनेस है, अनुभवी मैनेजमेंट टीम है, प्रशिक्षित मेडिकल प्रोफेशनल हैं लेकिन हॉस्पिटल एक प्रतिस्पर्धी बिजनेस है.

ये भी है तर्क

कोविड के बाद प्रॉफिटेबिलिटी के सामान्य स्थिति में आने से यह लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए उपयुक्त है. कुछ लोगों का ये भी कहना है कि कंपनी का लक्षित बाजार वित्त वर्ष 26 तक 14 फीसदी सीएजीआर दर से बढ़ने का अनुमान है. हालांकि, रेनबो के लिए हेल्थकेयर क्षेत्र में कंसॉलिडेशन में बढ़ोतरी के बीच मौजूदा ग्रोथ को बनाए रखना अहम होगा.

इन कंपनियों से बेहतर है पीई

कुछ रिसर्च एनालिस्ट ये भी अनुमान जता रहे हैं कि निवेशतों को लंबे नजरिए से शेयर को होल्ड करके रखना चाहिए. कंपनी की वैल्यूएशन (पीई की 43 गुनी) अपनी प्रतिस्पर्धी कंपनियों Apollo hospital और Fortis healthcare के मुकाबले काफी कम है. इन कंपनियों के शेयर क्रमशः 63 और 53 गुने पीई पर ट्रेड कर रहे हैं.

इसके अलावा जिओपॉलिटिकल संकट और ब्याज दरों में बढ़त से जारी उतार-चढ़ाव और निगेटिव सेंटीमेंट के चलते इश्यू बाजार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है. हालांकि मजबूत फंडामेंटल और आकर्षक बिजनेस मॉडल की वजह से लंबी अवधि के लिए इसमें दांव लगाया जा सकता है.

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