To Tame Rising Inflation Modi Government Likely To Cut Taxes On Edible Oil To Many Essential Items

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Modi Government To Tame Rising Inflation: बढ़ती महंगाई ( Rising Inflation) ने केंद्र की मोदी सरकार ( Modi Government) की परेशानी बढ़ा रखी है. जिसके चलते पहले सरकार ने गेंहू के निर्यात ( Wheat Export) पर रोक लगाया. फिर पेट्रोल डीजल ( Petrol Diesel) के दामों से राहत दिलाने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कमी का ऐलान किया. इसके अलावा सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए स्टील के निर्यात पर शिकंजा कसने के लिए एक्सपोर्ट ड्यूटी को बढ़ा दिया. अब माना जा रहा है कि सरकार महंगाई पर नकेल कसने के लिए कुछ और जरुरी चीजों पर टैक्स ( Tax) घटाने के ऐलान कर सकती है जिससे कीमतों में कमी लाकर महंगाई पर लगाम लगाई जा सके. 

खाने के तेल पर घट सकता है कृषि सेस
माना जा रहा है कि सरकार जल्द ही खाने के तेल के बढ़ते दामों में कमी लाने के लिए एडिबल ऑयल पर कस्टम ड्यूटी घटाने का फैसला ले सकती है. आम लोगों को महंगे तेल से राहत दिलाने के लिए क्रूड पाम ऑयल पर 5 फीसदी कृषि सेस को शून्य किया जा सकता है. महंगे खाने के तेल के ऑयल इंडस्ट्री भी परेशान है. यही वजह है कि इंडस्ट्री ने सरकार को कैनोला ऑयल पर इंपोर्ट ड्यूटी को 38.5 फीसदी से घटाकर 5.5 फीसदी करने की मांग की है. जिससे कैनोला तेल के आयात को शुरू किया जा सके. आपको बता दें रिफाइंड किया हुआ कैनोला ऑयल सनफ्लावर ऑयल के बदले में इस्तेमाल किया जा सकता है जिसकी रूस यूक्रेन युद्ध के चलते सप्लाई बाधित हुई है. 

सरकार के लिए राहत की बात ये है कि इंडोनेशिया ने 23 मई से पाम ऑयल के एक्सपोर्ट पर लगाये गए बैन को वापस ले लिया है.  भारत आने वाले 2,90,000 टन एडिबल ऑयल इंडोनेशिया के पोर्ट और ऑयल मिल में जो फंस गया था उसे भारत वापस लाया जा सकेगा. दरअसल 28 अप्रैल 2022 से इंडोनेशिया ने पाम ऑयल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था.  इंडोनेशिया पाम ऑयल के सबसे बड़ा उत्पादक देशों में से एक है तो भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल-खास तौर पर पाम तेल और सोया तेल के सबसे बड़े आयातक देशों में शामिल है.  

महंगाई दर में कमी का लक्ष्य
बीते हफ्ते पीएमओ और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों की महंगाई को लेकर बैठक हुई थी. जिसमें खुदरा महंगाई दर जो 7.79 फीसदी पर अप्रैल महीने में जा पहुंचा है. सरकार जरुरी कदम उठाकर महंगाई में कमी लाने की कोशिश में जुटी है. सरकार 80 बेसिस प्वाइंट से 1 फीसदी तक महंगाई दर घटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है. एक्साइज ड्यू घटाने, स्टील के एक्सपोर्ट पर रोक, सीमेंट की उपलब्धता बढ़ाने और गेंही के निर्यात से 50 बेसिस प्वाइंट महंगाई दर घटने की उम्मीद है. वाणिज्य मंत्रालय से ऐसे वस्तुओं के डिटेल्स मांगा गया है जिसपर टैक्स में कमी कर उनकी कीमतों को घटाया जा सके.  

महंगे कर्ज ने बढ़ाई चिंता
दरअसल 4 मई को आरबीआई ने रेपो रेट में 40 बेसिस प्लाइंट की बढ़ोतरी कर दी. फिर से आरबीआई गर्वनर ने ब्याज दर बढ़ाने के संकेत दिए है. आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाता है तो कर्ज महंगा होगा तो लोगों की ईएमआई महंगी होगी. जिससे मांग में कमी आएगी जिसका खामियाजा पूरे उद्योगजगत को उठाना होगा. सरकार का टैक्स कलेक्शन भी घटेगा. इसलिए सरकार की कोशिश है कि आयातित वस्तुओं पर टैक्स में कमी लाकर महंगाई में कमी लाई जाए . निर्यात पर रोक लगाकार घरेलू बाजार में जरुरी वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ाई जा सके. अगर महंगाई में कमी आती को आरबीआई ज्यादा ब्याज दरें बढ़ाने के लिए बाध्य नहीं होगा. और अर्थव्यवस्था को उसका जबरदस्त फायदा होगा जैसा कि बीते कुछ वर्षों में सस्ते कर्ज का मिला है. 

 

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